Friday, November 24, 2017


कहते हैं मयख़ानों के प्यालों में ग़म ग़लत होते हैं
सोचता हूँ कभी, क्या कुछ ग़म शायद सही होते हैं

सज़ा सी लगती है यह जो ख़ला किस ग़लती की है?

मयख़ाना- a bar/pub 
ग़म ग़लत करना- a Hindustaani expression meaning 'to try and reduce/overcome sadness/grief'
ख़ला- vacuum/void; used here in the context of loneliness after the beloved has left.

Monday, November 20, 2017


कुछ बयाँ को लफ़्ज़ों की मोहताजी नहीं होती
कुछ लफ्ज़ बिना बयाँ के, तनहा छूट जाते हैं

मरासिम आँखें थीं, मैं जाने क्यों लिखता था।

Some expressions have no dependence for words,
Some words are left lonely finding no expression,

Connection was of the eyes, wonder why I wrote.

मरासिम- relations or connection. 
Some poetic liberty has been taken with the syntax here.

Thursday, November 16, 2017


ख़ुदकुशी का तो रत्ती भर भी ख़याल नहीं रहता है मगर
बस यूँ ही ग़ुज़र जाने की ख़्वाहिश पल पल रहा करती है

जब, जहाँ, जैसी भी हो आखिरी साँस, बस अकेले न हो।

Not even a drift of a thought about suicide ever does occur but
The desire to simply pass away, remains moment after moment

Whenever, wherever, however be the last breath, just not alone.

Sunday, November 12, 2017


बिलकुल खाली हैं आँखें, टटोलो तो नींद भी नहीं
चुभते रेतीले लम्हों का सहरा है आँसुओं के बिना

जाने कब आओगी मेरे मकान पर कि वो घर बने।

Absolutely empty the eyes, not even sleep to be found,
A desert of piercing sandy moments without any tears,

Wonder when you'd come to my house; make it home.