Wednesday, December 27, 2017

छुँअन





















अपनी ही सी धुन में हवा के साथ लहरातीं
जाने-अनजाने कभी गुदगुदाती, सहलातीं

चेहरे को मेरे तुमने छुँआ भी और नहीं भी।

Waving with the breeze on their own tune
Knowing-unknowingly tickling, caressing

You have touched my face and yet haven't.

Tuesday, December 26, 2017

दवा





















यूँ कस जाता है सीना थमी साँस से
पिंजर में दिल भी कैद सा लगता है

नज़र भरके तुम्हे देख लूँ तो दवा हो।

The breath caught in the chest knots tight,
Heart too feels as if caged within the ribs,

Just a glance full of seeing you, my elixir.

Monday, December 25, 2017

हाथ

बड़ा सोचते हैं जब भी छूते हैं
थामते, सहलाते, कस लेते हैं

शक़्श ही तो हैं हाथ तुम्हारे!

They think a lot as they touch
Holding, caressing, gripping

Your hands are a personality!

Wednesday, December 13, 2017

आज-कल





















अपने आज में तुम्हें पाता हूँ तो जी लूँ मैं आज
कल की अनजान ज़िन्दगी कल ही में जियूँगा

बेफ़िक्र साथ बैठी रहो, घड़ी मैंने बंद कर दी है।

As I find you in my today, I'll live in it fully
The unknown of tomorrow, is for tomorrow

Simply sit with me, I've turned off the watch.




Tuesday, December 12, 2017

अब





















मिट्टी और पानी से गुंदे जाते हैं ख़यालात
उँगलियाँ इक दूजे से जैसे सी देतीं हैं हाथ

जो अर्से से ख़याल ही थी अब हक़ीक़त है।

Thoughts mould together like earth and water
Fingers, almost stitch the hands to each other

Who for long was only imaginary, is now real.


Friday, December 8, 2017

बदलाव

बेवक़्त सा लगता है, ऐसे अचानक मौसम का बदलना
ये भी लगता है, शायद वक़्त हो ही गया था बदलने का

मक़ान का जो रास्ता है, क्या वो अब घर को जाएगा ?

It feels untimely, this sudden change of the weather
Yet it feels that it's indeed high time that it changed

That road to the house, will it now lead to a home ?