Saturday, July 29, 2017

क़ैफ़ी

आवारा पन्नों में बसती हुईं
जैसे, चंद बाग़ी क़ैफ़ी नज़्में

महज़ लफ़्ज़ों के परे हो तुम।

Living within vagabond pages,
Few high-spirited rebel verses,

You're one beyond mere words.

क़ैफ़ी- of high spirits

Tuesday, July 25, 2017

कश्मकश

क्यों सही
क्यों नहीं

ज़िन्दगी!

Why so
Why no

Living!

Monday, July 17, 2017

सूरत

कम ही देखी है मगर जब भी सूरत निकली है ऐसी
नज़र भर कर देखी है, बिंदिया सजी सूरत तुम्हारी 

आओ सजा दूँ माथे पर तुम्हारे, रात का पूरा चाँद।

Rarely have I seen, but whenever it has so happened,
I've gazed my content upon your bindi adorned face,

Come, let me grace your temple with this full moon.



Friday, June 30, 2017

लापता

क्या सुनता है कोई; ये किसके लिए लिखता हूँ
क्या मायने बचे हैं कोई इन चुने हुए लफ़्ज़ों के

सुना है, उम्मीद की डोर अक़्सर दिखती नहीं।

Does anyone listen; whom do I still write for,
Do meanings still exist in these picked words,

The thread of hope is often invisible, I hear. 

Wednesday, June 28, 2017

अर्सा

ज़हन में ज़हीन कुछ भी नहीं
ख़ाली तरकश, ढीली कमान

इक अर्सा हो गया तुम्हे लिखे।

Nothing of worth in the mind,
Empty quiver, a warped bow,

Longtime, since I wrote to You.

Wednesday, June 14, 2017

सतरंगी

बरसात में धुली जैसे, नम मद्धम सी धूप
घरों के छतों पर टेक लगाए एक इंद्रधनुष

सतरंगी साड़ी पहनी थी तुमने उस रोज़।

Rain washed sun's moist cozy light,
Resting on the rooftops, a rainbow,

You wore your spectral sari that day.

Saturday, May 27, 2017

पोर्सिलेन

कदम बादल
गोरे नाज़ुक

तुम्हारे पाँव।


Cloud step,
Dainty fair,

Your feet.

Thursday, April 27, 2017

क़ायम

कुनकुनी आँह
गहराई रौशनी

तुम्हारी नज़र। 

Warm sigh,
Deep light,

Your gaze.

Tuesday, April 25, 2017

सुनना

सब्र अक्लमन्दी
अलेहदा  सनक

तुम्हारा बोलना।

Steady wisdom,
Eloquent ​quirky,


Your speaking.

Wednesday, April 12, 2017

सफर

सफ़हे गुज़रते जा रहें हैं
ज़िंदगियाँ पलटतीं जा रही हैं।
सुफैद बर्फ़ से पल गिर रहे हैं परतों में
वक़्त बजाए ग़ुज़रने के यहाँ से
यहीं ठंडा जमता जा रहा है।
क़दमों को इंतज़ार है उफ़क़ का
ज़र्द आँखों से सूखी नींद बह रही है।
अर्सा इक हो गया है यहाँ पानी को बरसे
हवा पुरानी उन टहनियों में उलझ कर रह गयी है।
चाँद की चाँदी पर वैसे ही चमकती है
जैसे सूरज रोज़ गर्म रौशन होता है।
दिन मगर गलत पतों पे पहुँचते हैं,
और रातों के मोड़ छूटते रहते हैं।
आवाज़ों की पुकार सी सुनाई तो पड़ती है,
ज़ुबाँ पर उनकी, और समझ नहीं आती।
महसूस की छुअन सुन पड़ रही है,
नसें थक हार कर अब सोने जा रहीं हैं।
जिन हाथों के ख़याल को अब तक था थामा
उन्हें उँगलियाँ अब उतारने ने लगीं हैं।
जिन आँखों को नज़रों से यूँ तो कभी न छुंआ
जाने क्यों उनका चेहरा नज़र आ रहा है।
सफ़हे सा जो शुरू हुआ था कोरा
झुर्रियों में मुड़ा वो क़ाग़ज़
सियाही में डूब जाने को चला जा रहा है। 


सफ़हे- Pages; उफ़क़- Horizon; ज़र्द- Yellow/Yellowed

Friday, April 7, 2017

बरक़रार

कुनकुने यक़ीं 
मुलायम वादे 

तुम्हारे हाथ। 


Sure warmth,
Soft promise,

Your hands.

Monday, April 3, 2017

चाँदी

शायद चाँद में डुबो कर बिखेर दिए थे शरारत में उन्हें
या कोरे क़ाग़ज़ को छूकर उन से ग़ुज़ारी थी उँगलियाँ

देखो तो, तब से कितनी चाँदी आ गई है बालों में मेरे।

Tousled it playfully, after dipping them in a full moon,
Ran your fingers through having touched blank paper,

See, how much silver's been shining in my hair since.

Sunday, April 2, 2017

ओट

रेशम सी लहरें 
वो सियाह लटें

तुम्हारी ज़ुल्फ़ें। 


Silk wave,
Ink locks,

Your hair.

Monday, March 27, 2017

गिरफ़्त

लजाती भोर
धड़कता रंग 

तुम्हरी शर्म।  


Coy dawn
Hued thrill

Your blush.

Thursday, March 23, 2017

क़ायम

ख़ालिस भरोसा 
मुन्तज़िर शोला

तुम्हारी छुअन। 



Pure belief,
Waiting fire,

Your touch.