Sunday, May 20, 2018

जज़्ब

रोज़ मर्रा की आवाज़ों की सुन्न सी बू में कभी कभी इत्र की शीशी सा
फूट कर कोई लफ़्ज़ कई लम्ह-ओ-ख़यालात फिर सब्ज़ कर जाता है

कॉफ़ी के मग में चाय में जज़्ब होता बिस्कुट और बीती यादों में हम।

At times, in the numb smell of everyday noises like a vial of perfume 
Shatters a certain word, reviving many a moment and thoughts past

The biscuit being soaked in tea in a coffee mug, and us in nostalgia.


सब्ज़- the colour green in Urdu, used here to mean fresh; जज़्ब- to get absorbed

Saturday, May 19, 2018

तराशें

लावा से सुलगते रहते हैं हौले हौले अरमाँ; डर सा है कि 
आँखों में झलकता घुँआ, ना जाने अब उबले तब उबले

आओ साथ तराशें ख़ामोशियाँ रंगों-ओ-सुर-ओ-ज़ुबाँ से।

Like lava wishes smoulder ever so steady; but there's a fear,
Uncertain when the smoke brimming the eyes will boil over,

Together let's shape silences with colours, notes and words.

Monday, May 14, 2018

ह्रदय स्पर्श

गुरु, वयस्क व श्रद्धेय के चरणस्पर्श हैं सम्मान अर्पण
हमारे राष्ट्र की सन्स्कार दृष्टि में है पुण्याशीष अर्जन

वक्ष पर ह्रदय स्पर्श कर लेंगे, परस्पर सम सम्मान में।

Touching the feet of teachers, elders and the revered is paying respects,
In the view of our country's sacrament. it is earning goodwill blessings,

In our mutual respect let's touch each other's chest where lies the heart.

ग़ुज़ार

मुलाक़ात न हो पायी आज
ना हुई प्यास भुझाती बात 

रात यादों संग ग़ुज़ार रहा हूँ। 

Couldn't meet today nor
Did we speak satiatingly

Tonight is with memories.

Sunday, May 13, 2018

महक

मज़्मून तो कुछ और ही था तुम्हारा उस बात को कहने में
मेरी सोच पल भर को थम गयी और अपनी राह बदल ली

पहली बारिश की महक ग़र मिट्टी की न होकर पानी की हो?

Your context for saying what you had said was quite different,
Yet, my thought for a moment paused and then changed paths,

Could the aroma of petrichor not be of the earth but of water?

मज़्मून- Context

Friday, May 11, 2018

झप्पी

दिन भर वो ज़िंदा होता तो है इस पिंजर सीने में  
ज़िन्दगी उसकी मगर यूँ नहीं धड़कती है हमेशा 

शाम आज यूँ लिपट कर मुझ से मिली थी तुम। 

It lives through the day within the chest's cage,
Its life however seldom throbs in such fashion,

You met me this evening with such a tight hug.

Tuesday, May 1, 2018

अमीर

कल का पूरा चाँद देखा चिपका
आसमाँ पे इक रुपय्ये के जैसा

रात टहलते, हम भी अमीर थे।

Yesterday's full moon I'd seen stuck
Upon the sky, just like a rupee coin

We too were rich, walking last night.