Thursday, March 23, 2017

क़ायम

ख़ालिस भरोसा मुन्तज़िर शोला

तुम्हारी छुअन। 



Pure belief,
Waiting fire,

Your touch.

Tuesday, March 21, 2017

कलियाँ

रूहानी छुअन
मासूमी 
सुर्ख़ 

तुम्हारे होंठ।  


Spirit touch
Tender red

Your lips.

Wednesday, March 15, 2017

मीठी

शबनमी मासूम
है शहद सुनहरी

आवाज़ तुम्हारी।

Chaste dew,
Honey gold,

Your voice.

Saturday, March 11, 2017

गहरी

काली झील
सियाह रात

तेरी आँखें।

Black lake,Inky night,
Your eyes.

Sunday, March 5, 2017

पोशीदा

सतह अब भी काँच सी सपाट है
गहराइयाँ भी उस रोज़ से, बाँझ

पोशीदा लहरों सी हैं कुछ यादें।

Surface still, as still as glass
Depths since remain lifeless

Memories're invisible ripples.

Tuesday, January 31, 2017

रिहाई

हर गुज़रते पल के साथ, घटती है उम्र
हर साँस एक सलाख और जोड़ देती है

कब जिस्म रूह की कैद से रिहा होगा?

Every passing moment deducts from the age,
Every intake of breath adds a bar to the cell,

When'd the body be free of the soul's prison?

Friday, January 20, 2017

फ़ासला

जो मुक़्क़मल हो तो ख़ुशी से छलक जाते हैं
ग़र नाक़ामयाब तो सब्र तोड़कर बह जाते हैं

हर्फ़ भर का फ़ासला है इश्क़ और अश्क़ में।